प्रस्तावना
जब पेट में भूख की आग धधक रही हो और सिर पर सोने के लिए छत न हो, तब इंसान सिर्फ जिंदा रहने की जद्दोजहद करता है, सपने देखने की नहीं। लेकिन मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के एक बेहद पिछड़े गांव से आने वाले मनोज कुमार शर्मा ने उन अंधेरी रातों में भी एक अफसर बनने का सपना देखा। यह कहानी उन युवाओं के लिए एक तमाचा है, जो अपनी कमियों और कम नंबरों का रोना रोते हैं।
शुरुआती असफलता: जब पढ़ाई में लगे ‘नाकामयाब’ होने के ठप्पे
मनोज कुमार शर्मा की कहानी किसी ‘ब्रिलियंट स्टूडेंट’ की कहानी नहीं है। 9वीं और 10वीं कक्षा में वे बमुश्किल थर्ड डिवीजन से पास हुए। 11वीं में भी जैसे-तैसे नकल करके पास हो गए। लेकिन 12वीं की बोर्ड परीक्षा में एसडीएम ने सख्ती कर दी और नकल नहीं होने दी, नतीजा— मनोज 12वीं में फेल हो गए।
जब उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और किसी तरह पास होकर B.A. (बैचलर ऑफ आर्ट्स) में एडमिशन लिया, तब भी उनका अकादमिक रिकॉर्ड बहुत साधारण रहा। उन्होंने अपना B.A. महज थर्ड डिवीजन (Third Division) से पूरा किया। समाज और रिश्तेदारों की नजर में ऐसा छात्र जिंदगी में कुछ बड़ा नहीं कर सकता था।
पेट की भूख और ग्वालियर की सड़कें
मनोज को समझ आ गया था कि गांव में रहकर कुछ नहीं होगा। खाली जेब लिए वे ग्वालियर आ गए। यहां उनका संघर्ष किसी भी इंसान की रूह कंपा देने के लिए काफी था।
पैसे नहीं होने के कारण कई रातें उन्होंने ग्वालियर की सड़कों पर भिखारियों के साथ सोकर गुजारीं। भूख मिटाने के लिए उन्होंने एक आटा चक्की पर काम करना शुरू किया, जहां वे दिन-रात आटा पीसते थे। इसके बाद उन्होंने लाइब्रेरी में चपरासी का काम भी किया। इसी लाइब्रेरी में काम करते हुए उन्होंने महान विचारकों और सफल लोगों की किताबें पढ़ीं, जहां से उन्हें UPSC के बारे में पता चला।
कुत्ते टहलाए, लेकिन आत्मसम्मान नहीं बिकने दिया
UPSC की तैयारी के लिए जब वे दिल्ली के मुखर्जी नगर पहुंचे, तो उनके पास फीस और कमरे के किराए के पैसे नहीं थे। दिल्ली जैसे महंगे शहर में टिके रहने के लिए मनोज ने अमीर लोगों के कुत्तों को टहलाने का काम किया।
लोग अक्सर उन्हें ‘कुत्ते वाला’ कहकर बुलाते थे। एक ऐसा युवा जो देश का सबसे बड़ा अफसर बनने का सपना देख रहा हो, उसके लिए यह काम करना कितना अपमानजनक रहा होगा, इसकी सिर्फ कल्पना की जा सकती है। लेकिन मनोज ने हर अपमान का घूंट पिया, क्योंकि उनकी नजर सिर्फ अपनी मंजिल पर थी।
चौथा और आखिरी प्रयास: करो या मरो
लगातार तीन बार UPSC में असफलता मिलने के बाद मनोज पूरी तरह टूट चुके थे। यह उनका चौथा और आखिरी प्रयास (Attempt) था। इस बार उन्होंने अपनी जिंदगी का हर एक कतरा पढ़ाई में झोंक दिया। उन्होंने अपनी प्रेमिका (जो अब उनकी पत्नी हैं) से कहा था कि “अगर तुमने मेरा साथ दिया, तो मैं दुनिया पलट दूंगा।” साल 2005 के परिणाम ने सच में दुनिया पलट दी। 12वीं में फेल होने वाले और B.A. में थर्ड डिवीजन लाने वाले मनोज कुमार शर्मा ने UPSC परीक्षा पास कर ली थी। वे All India Rank 121 के साथ IPS अधिकारी बन गए।
निष्कर्ष: आपके लिए क्या संदेश है?
मनोज कुमार शर्मा (IPS) का यह सफर हमें चीख-चीख कर यह बताता है कि आपकी पिछली असफलताएं आपका भविष्य तय नहीं करतीं। आपके ग्रेजुएशन में भले ही 40%, 43% या 45% मार्क्स क्यों न हों, अगर आज आपमें मेहनत करने की आग है, तो पुरानी मार्कशीट कागज के टुकड़ों से ज्यादा कुछ नहीं हैं। गरीबी और कम नंबरों को अपनी कमजोरी नहीं, अपनी जिद बनाइए।
” क्या आपके भी ग्रेजुएशन में कम नंबर हैं और लोग आपको ताने देते हैं? मनोज सर की कहानी पढ़ने के बाद अब आपका क्या सोचना है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार साझा करें।”
12वीं में फेल, B.A. में थर्ड डिवीजन और सड़क पर गुजारी रातें: मनोज शर्मा की चक्की वाले से लेकर IPS बनने की सच्ची कहानी
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