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सबसे बड़ी दूरबीन जुलाई से खोलेगी ब्रह्मांड के रहस्‍य, जानें इसके बारे में

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope) इस साल जुलाई से अपना काम शुरू कर देगा और दुनिया को ब्रह्मांड की बेहतरीन तस्‍वीरें देखने को मिलेंगी। प्रोजेक्‍ट से जुड़े एक एस्‍ट्रोनॉमर ने यह बात कही है। यह अंतरिक्ष में भेजा गया अबतक का सबसे बड़ा और महंगा टेलीस्‍कोप है। पिछले साल दिसंबर में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने इसे लॉन्‍च किया था। जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप वहां हबल स्‍पेस टेलीस्‍कोप की जगह लेगा, जो साल 1992 से सर्विस दे रहा है और दुनिया को ब्रह्मांड के रहस्‍यों से रू-ब-रू करवा रहा है।

एक न्‍यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह टेलीस्‍कोप बीते 5 महीनों से अपने इंस्‍ट्रूमेंट्स को तैयार कर रहा है। हालांकि वैज्ञानिकों ने यह जानकारी नहीं दी कि फ‍िलहाल इस टेलीस्‍कोप के कैमरों को कहां पॉइंट किया गया है। बाल्टीमोर में स्पेस टेलीस्कॉप साइंस इंस्टि‍ट्यूट के एक वैज्ञानिक क्लॉस पोंटोपिडन ने कहा कि हम वास्‍तव में हैरान होना चाहेंगे। 

पोंटोपिडन ने कहा कि जेम्‍स वेब की टीम इस टेलीस्‍कोप द्वारा टेस्टिंग के तौर पर ली गई कुछ इमेजेस को रिलीज कर चुकी है, लेकिन नई तस्‍वीरों में एस्‍ट्रोफ‍िजिक्‍स को टार्गेट किया जाएगा, जिसके जरिए ब्रह्मांड और मानव जाति के बारे में विस्‍तार से समझा जा सकता है। इन इमेजेस को इन्फ्रारेड में शूट किया जाएगा और रंगीन बनाकर दुनिया के सामने लाया जाएगा। जुलाई में ऐसी पहली तस्‍वीर सामने आने की उम्‍मीद है। 

जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप उन ग्रहों का भी अध्‍ययन करेगा, जिन्हें एक्सोप्लैनेट के रूप में जाना जाता है। इससे वैज्ञानिक इन ग्रहों की उत्पत्ति, विकास और क्‍या वो रहने लायक हैं, यह जान सकेंगे। 10 अरब डॉलर (लगभग 75,330 करोड़ रुपये) का जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप अब तक का बनाया गया सबसे बड़ा टेलीस्‍कोप है। इसका मकसद खगोलविदों को सफल खोजों में मदद करना है। 

पिछले महीने इस टेलीस्‍कोप ने एक सिंगल तारे की संगठित (unified) इमेज शेयर की थी। ज्‍यादातर ट्रेडिशनल टेलीस्‍कोप में एक प्राइमरी मिरर होता है, जो लाखों मील दूर स्थित तारों की रोशनी को इकट्ठा करता है। लेकिन जेम्‍स वेब में 18 हेक्सागोनल (hexagonal) मिरर सेगमेंट हैं। ये सभी एक बड़े मिरर के रूप में जुड़े और इमेज को तैयार किया। यह एक लंबी प्रक्रिया थी, जिसमें बहुत सटीकता की जरूरत थी। नासा ने बताया है कि जेम्‍स वेब की टीम ने ‘फाइन फेजिंग’ नाम की प्रक्रिया के तहत मिरर्स को सफलतापूर्वक एक सीध में किया। 
 

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