ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रहा है चीन, जानिए क्यों


एक समय था जब चीन (China) की जनसंख्या (Population) दुनिया में सबसे ज्यादा थी. बढ़ती आबादी से चिंचित होकर चीन ने सख्ती से “एक परिवार एक बच्चा” (One family one Child) की नीति अपनाई और आबादी की बढ़त को काफी हद तक नियंत्रित भी कर लिया. लेकिन चीन की इस नीति के उसे कई तरह की परेशानियां भी हुईं. अब चीन ने इस एक परिवार एक बच्चा की नीति को खत्म कर लिया है. लेकिन हाल ही में चीन सरकार ने फिर लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने वाले कदम उठाए हैं. अब चीनी सरकार दम्पत्तियों को और ज्यादा बच्चे पैदा करने के कई तरह की आकर्षक स्कीम भी लेकर आ रही है.

कब अपनाई थी एक बच्चा नीति
चीन ने बहुत पहले 1979 में एक परिवार एक बच्चा की नीति अपनाई थी.  उस समय साम्यवादी चीनी सरकार का मानना था कि बढ़ती जनसंख्या चीन की अर्थ्वयवस्था और वहां के लोगों के जीवन स्तर के सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों को नुकसान पहुंचा सकती है. जनसंख्या के अनियंत्रित होने की डर से ही चीन ने यह अनोखी नीति अपनाई थी.

क्या समस्याएं आईं
चीन की एक परिवार एक बच्चा नीति का ही नतीजा था कि चीन में जनसंख्या वृद्धि की दर में तेजी आना बंद हो गई. लेकिन इससे कई तरह कीसमस्याएं भी पैदा होने लगीं जैस बूढ़ों की संख्या अधिक हो जाना, श्रमिकों की संख्या में कमी हो जाना, बच्चों में भाई बहनों के संबंधों से परिचय का अभाव होना आदि. इनमें सबसे चिंताजन श्रमिकों की संख्या में कमी होना थी.

जनसंख्या नीति में बदलाव क्यों
इन सभी समस्यों को देखते हुए चीन ने एक परिवार एक बच्चे की नीति को साल 2016 में खत्म कर दिया. लेकिन इसके बाद भी जन्मदर गिरावट आई और 2019 में प्रति एक हजार पर जन्में बच्चों की संख्या 10.48 तक पहुंच गई. कोरोना काल में भी जनसंख्या की वृद्धि अपेक्षा से कम ही रही. ऐसे में इस साल चीन ने फैसला किया जनसंख्या नीति को बेहतर बनाया जाए.

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इस समय चीन (China) दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: TonyV3112 / Shutterstock.com)

तो क्या किया है चीनी सरकार ने
बच्चों की जन्मदर में नाटकीय गिरावट के कारण चीनी सरकार ने बीते मई के महीने पहले ही  दम्पत्तियों को तीन बच्चे पैदा करने की छूट देने का ऐलान किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा ना किया गया तो अगले पांच साल में चीन की जनसंख्या वृद्धि बहुत ही कम रह जाएगी. कई प्रांतों में मातृत्व छुट्टी के दिनों को बढ़ाया जा रहा है, तो कहीं उसके साथ पूरे भुगतान के साथ एक साल तक बढ़ाने तक पर विचार किया जा रहा है.

इस तरह के प्रस्ताव भी
अलग अलग प्रांतों में जनसंख्या नीति और परिवार नियोजन संबंधी कानूनों को बदलने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है तो इसके लिए लोगों से रायशुमारी भी की जा रही है. इसके साथ ही पितृत्व अवकाश, के साथ चाइल्ड केयर या चाइल्ड रेजिंग लीव भी दिए जाने के प्रस्ताव भी दिए जा रहे हैं जिससे लोग बच्चे पैदा करने को ज्यादा झंझट वाला काम ना समझें.

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चीन (China) में जन्म दर की गिरावट के कारण ही इस तरह की नीतियां देखने को मिल रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: TonyV3112 / Shutterstock.com)

ये है बड़ी वजह
इतना ही नहीं कई प्रांतो में तो एक दम्पत्ति को चार बच्चे पैदा करने की अनुमति दी जा रही है.  वहीं बच्चों की परिवरिश के लिए रोज एक घंटे की छुट्टी के साथ आर्थिक  पुरस्कार भी प्रस्तावित हैं. ये सभी बदलावों की सबसे बड़ी वजह पांच साल पहले दो बच्चों की नीति अपनाने के  बाद भी जनसंख्या में अपेक्षित वृद्धि ना होना बताई जा रही है. जिसने चीनी सरकार को चिंता में डाल रखा है.

चीन में कम्युनिस्ट शासन होने के कारण वहां एक परिवार एक बच्चा की नीति सख्ती से लागू कर सकी.  फिर भी कई जगहों पर दो बच्चों वाले परिवार भी पाए जाते हैं. लेकिन नीति सफल ही रही जिससे 21वीं सदी में चीन में बुजुर्गों की संख्या बहुत बढ़ गई, वहीं श्रमिकों की संख्या कम होने लगी. अब चीन जनसंख्या बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन की नीतियां अपनाई जा रही हैं.

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