जानिए न्यूट्रॉन तारे में कैसे बदल जाता है एक मरता हुआ तारा


न्यूट्रॉन तारे (Neutron Star) का निर्माण में हर स्तर पर अलग-अलग नियमों वाली प्रक्रियाओं से गुजरता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

न्यूट्रॉन तारे (Neutron Star) का निर्माण में हर स्तर पर अलग-अलग नियमों वाली प्रक्रियाओं से गुजरता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

न्यूट्रॉन तारे (Neutron Star) के निर्माण खास आकार के तारे के मरने (Death of Star) से होता है. इस निर्माण प्रक्रिया में कई स्तरपर बदलाव देखने को मिलते हैं जिसका नतीजा यह होता है कि सूर्य के भार वाला पिंड बहुत ही ज्यादा संकुचित हो जाता है जो भारी तादाद में न्यूट्रॉन (neutrons) से भरा होता है. इतना ही नहीं मरते हुए तारे की सतह पर अलग अलग प्रक्रियाएं होती हैं जिनमें न्यूट्रॉन की मात्रा से लेकर उनकी अवस्थाएं बदल जाती हैं. यहां तक उन्हें संचालित करने वाले भैतिकी के नियम तक बदल जाते हैं.

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तारों में न्यूट्रॉन तारे (Neutron Star) बहुत ही विचित्र होते हैं. वैसे तो यह तारों (Stars)की एक विशेषअवस्था से बनते हैं, लेकिन ये बहुत ही घने होते हैं. इनमें इतना अधिक घनत्व होता है कि एक बड़े शहर में ही पूरे का पूरे सूर्य (Sun) के भार समा जाता है. इन तारों का घनत्व इतना ज्यादा हो जाता है कि ये एक विशाल परमाणु के आकार के हो जाते हैं जिनमें भारी संख्या में न्यूट्रॉन होते हैं जिनकी वजह से इन्हें न्यूट्रॉन तारा कहा जाता है. इन तारों की ऐसी अवस्था कैसे आ जाती है यह समझने के लिए अंतरिक्ष में कणों पर गुरुत्व के प्रभाव को समझना होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
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हर तारे (Star) के अंदर एक तरह की जद्दोजहद चल रही होती है. जहां गुरुत्व कणों के अंदर की ओर खींचता है वहीं नाभकीय प्रतिक्रियाओं (Nuclear Reactions) के कारण पैदा हुई गर्मी पदार्थ को बाहर फेंकने का प्रयास करती है. इससे तारा प्लाज्मा की एक स्थिर गेंद बन जाता है. देर सवेर यह नाभकीय तंदूर ठंडा हो जाता है. न्यूट्रॉन तारे (Neutron Star) के निर्माण की इस शुरुआती प्रक्रिया में हमारे सूर्य से 10 से 30 गुना बड़े तारों में ठंडी गैस गुरुत्व के कारण अंदर खिंचने लगती है जिसके कारण वह तारे के अंदर के गर्म लोहे से टकराती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
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इसके फलस्वरूप न्यूट्रॉन तारे (Neutron Star) में ही सुपरनोवा (Supernova) के जैसा एक बड़ा विस्फोट हो जाता है. इससे क्रोड़ में लोहा (Iron) बच जाता है जो सूर्य से थोड़ा भारी होता है जिसके पतले वातावरण में हाइड्रोजन और हीलियम होता है. इस गेंद के आकार के पिंड में गुरुत्व बहुत ज्यादा शक्तिशाली होता है. अत्याधिक दबाव के कारण इससे लोहे के परमाणु के केंद्रक बड़ी क्रिस्टल संरचना का निर्माण करते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA)
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न्यूट्रॉन तारे (Neutron Star) में इस क्रिस्टल के बीच में से इलेक्ट्रॉन केंद्रकों के बहुत पास लेकिन उन्मुक्त रूप से घूमते रहते हैं. क्वांटम भौतिकी के अनुसार ये इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन से जुड़ जाते हैं और एक न्यूट्रॉन (Neutrons) और न्यूट्रीनों (Neutrino) के जोड़े में बदल जाते हैं. न्यूट्रॉन उपपरमाणु कण होता है जिसका भार तो प्रोटोन की ही तरह होता है, लेकिन उसका कोई आवेश नहीं होता है. वहीं न्यूट्रीनो लगभग भारहीन लेकिन तटस्थ उपपरमाणु कण होते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
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न्यूट्रीनो (Neutrino) का भार तो नहीं होता है, लेकिन न्यूट्रॉन (Neutron) का भार होता है जिससे लोहे का अजीब आइसोटोप बन जाता है जिसमें भार तो लोहे का होता है, लेकिन प्रोटोन बहुत कम होते हैं. अंदर के हिस्से में ऐसे परमाणु (Atoms) भी होते हैं जिनमें न्यूटॉन इतना ज्यादा होता है कि वे अस्थिर हो जाते हैं और अलग-अलग तक होने लगते हैं जिसका आधार यह सिद्धांत होता है कि एक ही तरह के कण एक ही समय पर एक ही जगह पर नहीं होते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
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यही वजह है कि इस मरे हुए न्यूट्रॉन तारे (Neutron Star) के केंद्र के एक किलोमीटर भीतर न्यूट्रॉन का कोहरा होता है जिसमें यहां वहां कुछ प्रोटोन भी दिख मिलते हैं. परमाणुओं (Atoms) के केंद्रक इतने पास होते हैं कि वे एकदूसरे से टकरा भी जाते हैं. गुरुत्व बढ़ते रहने से एक खास तरह परमाणु संरचना (Atomic Structure) बन जाती है जिसमें तीव्र नाभकीय बल और सकारात्मक अपकर्षण का संतुलन बन जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
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वहीं न्यूट्रॉन तारे (Neutron Star) के केंद्र में हालात और भी अजीब होते हैं. न्यूट्रॉन जोड़ों के स्थिति में आ जाते हैं और इस नई अवस्था में आ जाते हैं जिससे नए अजीब प्रवाह बन जाते हैं वहीं बिलकुल केंद्र में न्यूट्रॉन गुरुत्व (Gravity) के कारण अपने मूल कणों, क्वार्क के गुच्छे में बदल जाते हैं और जब ये क्वार्क भी आपस में जुड़ने लगते हैं उसकी और बाद की स्थिति की व्याख्या नहीं की जा सकती है और न्यूट्ऱॉन तारे के बनने से पहले ही यह मरा हुआ तारा ब्लैक होल (Black Hole) में बदल जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

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