जानिए क्या है Eye Five और भारत के लिए क्या है इसकी अहमियत


चीन की महत्वाकांक्षाएं भारत (India) के लिए सिरदर्द बनी हुई  हैं. वह पहले ही दुनिया की महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका को कई लिहाज से चुनौती दे रहा है. चीन की विस्तारवादी नीति को रोकने के लिए भारत ने अमेरिका (USA) से हाथ मिलाया है. अमेरिका भी चीन को रोकने के लिए कई कदम उठा रहा है. अमेरिका अब दुनिया के कई देशों से सहयोगात्मक रवैया अपना रहा है. इसी के तहत हाल ही में उसने दक्षिण कोरिया को अपने ‘फाइव’ (Five Eyes) आइज संगठन से जुड़ने का न्योता दिया है जिससे संबंधित एक बिल पर अमेरिकी संसद के निचले सदन में मतदान के लिए मंजूरी मिल गई.

क्या था फाइव आइज
‘फाइव आइज’ एक ऐसा इंटेलिजेंस संगठन है जिसमें अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड सहयोगी देश के रूप में काम करते हैं. इस संगठन की अवधारणा बहुत पुरानी है, जब द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका और यूके के कोड ब्रेकर्स आपस में अनौपचारिक मीटिंग किया करते थे. दोनों देशों की खुफिया तंत्र के सदस्यों ने गुप्त वार्ताएं करना शुरू कर दिया था जिनका मकसद विश्व युद्ध को खत्म करने के उद्देश्यों का निर्धारण करना था.

महाशक्तियों की जद्दोजहद
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में शीत युद्ध की शुरुआत हुई थी जिसमें अमेरिका और सोवियत संघ के बीच पूरी दुनिया को धुरियों में बंट गई थीं. 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस ने उसकी विरासत संभाली, लेकिन फिर अमेरिका का सारे संसार में दबदबा हो गया. रूस अमेरिका से अब सीधा टकराव करने बचता रहा है, लेकिन चीन की अपने आसपास के समुद्री इलाकों में विस्तार वादी नीति उसके पड़ोसियों के साथ अमेरिका के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई.

नए सहयोगियों की तलाश
अमेरिका का दक्षिण कोरिया को फाइफ आइज से जुड़ने का प्रस्ताव इसी संदर्भ में देखा जा रहा है. अमेरिका इस फाइव आइज संगठन में केवल दक्षिण कोरिया ही नहीं बल्कि भारत, जर्मनी और जापान को भी जोड़ना चाहता है. अमेरिकी संसद में जो बिल पेश किया जा रहा है उसका उद्देश औपचारिक तौर से अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के लिए अगले वित्तीय वर्ष के लिए फंडिंग अधिकृत करने का है.

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फिलहाल फाइव आइज (Five Eyes) समूह में अमेरिका, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड सदस्य देश हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

बड़ी शक्तियों से निपटने के लिए
इसमें फाइव आइज सहित अमेरिकी सहयोगियों से खुफिया तौर से मिलने जानाकरी के लिए ऑपरेशन के सहयोग भी शामिल है. इस बिल के मसविदे की समीक्षा करने वाली इंटेलिजेंस एंड स्पेशल ऑपरेशन की कांग्रेसी उपसमिति ने अपनी रिपोर्ट में इस संगठन का जिक्र किया है. समिति का मानना है कि चीन और रूस जैसी बड़ी शक्तियों के साथ प्रतिस्पर्धा में फाइव आइज देशों के मिलकर काम करना बहुत जरूरी है.

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फाइव से नाइन आइज हो जाएगा
रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि इसके साथ ही इसमें समान मानसिकता वाले देशों की शामिल किया जाना चाहिए. इसके नए संभावित सदस्य देशों में कोरिया के अलावा जापान, जर्मनी और भारत का भी नाम लिया गया है. यदि यह बिल अमेरिकी संसद में पास हो जाता है और राष्ट्रपति जो बाइडन इसमें हस्ताक्षर कर देते हैं, यह फाइव आइज औपचारिक तौर से नाइन आइज हो सकता है.

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अमेरिका चाहता है कि फाइव आइज (Five Eyes) समूह में भारत, जापान, दक्षिण अमेरिका और जर्मनी भी जुड़ जाएं. (फाइल फोटो)

कैसे बना पांच देशों का समूह
दक्षिण कोरिया सरकार की ओर से इस मामले में आधिकारिक रुख स्पष्ट नहीं किया गया है, जबकि कई बार दोनों देशों के बीच इसको लेकर चर्चा का जिक्र जरूर होता रहा है. इस संगठन की औपचारिक शुरुआत 1946 में यूकेयूसए समझौते से हुई थी. इसमें 1948 में कनाडा और फिर 1956 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जुड़ गए थे.

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वैसे तो शीत युद्ध के दौरान  देशों में खुफिया जानकारी साझा करने में सहयोग लिया ही था, इसके अलावा यूरोप और एशिया के कई देशों ने भी थर्ड पार्टी के तौर पर इसमें सहयोग किया था. साल 2013 में अमेरिकी सांसदों ने तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा से जर्मनी को इस समूह में शामिल करने की गुजारिश की थी. 2019 में भारत जापान और दक्षिण कोरिया को इसमें शामिल करने का प्रयास किया गया था. पिछले साल भारत और जापान ने स्मार्टफोन कूटयुक्त एप्लिकेशन में “बैकडोर एंट्री” की इजाजत के लिए तकनीकी कंपनियों से संयुक्त अपील के लिए फाइव आइज का साथ दिया था.

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