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पृथ्वी पर आया भूचुंबकीय तूफान, जानिए क्या हुआ था उसका असर


पिछले सप्ताह सूर्य (Sun) की सतह पर तूफान आने और उससे निकलने वाली सौर ज्वाला (Solar Flare) और अन्य विकिरणों की घटनाओं के बढ़ने की खबरें चर्चा में रही हैं. इससे पृथ्वी पर भूचुंबकीय तूफान आने की आशंकाएं भी बताई जाती रहीं. हमारा सूर्य इन दिनों एक ऐसी अवस्था में आ गया है जहां उसकी सतह की क्रियाशीलता ज्यादा ही दिखाई दे रही है. पिछले दो तीन दिन में सूर्य पर ऐसी सक्रियता फिर देखने को मिली और एक बार फिर पृथ्वी पर उसके असर की चर्चा शुरू हो गई. इस बार भी उसका असर उत्तरीय प्रकाश (Northern Lights के रूप देखने को मिला लेकिन इसका रूप विनाशक नहीं था.

कुछ नया सा दिखा असर
रविवार को ही सूर्य से विशालकाय ज्वालाओं का प्रभाव पृथ्वी पर दिखाई देने की खबर आने लगी थी जिसका असर आकाश में नॉर्दर्न लाइट के रूप में देखने को मिला. आम तौर पर इस तरह की आकाशीय घटना ध्रुवों पर देखी जाती है, लेकिन इस बार यह घटना निचले अक्षांश वाले इलाकों में देखने को मिली है.

नई जगहों पर दिखे ऑरोर
पृथ्वी के मैग्नेटोस्फियर से निकले आवेशित कणों की पृथ्वी के मैग्नेटोस्फियर के साथ होने वाली अंतरक्रिया के कारण यह जी3 श्रेणी का भूचुंबकीय तूफान देखने को मिला जिससे निचले अक्षांश वाले कई इलाकों में ऑरोर दिखा दिए जहां आमतौर पर ये दिखाई नहीं दिए जाते हैं. केवल ध्रुवों पर दिखने वाले ऑरोर आमतौर पर उत्तरी ध्रुवों पर ज्यादा दिखाई देते हैं.

कितना खतरनाक था असर
अमेरिकाके स्पेस वेदर प्रिडिक्शन सेंटर का कहना है कि जी3 श्रेणी के स्तर के इस तूफान असर हमारी तकनीक पर बहुत मामूली होता है. इसलिए इसका भूचुंबकीय तूफान से  कोई उल्लेखनीय नुकसान देखने को नहीं मिला. एजेंसी का कहना है कि जी3 तूफान ने ऑरोर और ज्यादा दूर दिखाई दिए. ये सामान्यतया ध्रवीय इलाकों से काफी दूर थे जहां वे हमेशा दिखते हैं

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सौर तूफान के पृथ्वी के मैग्नेटोस्फियर से टकराने से यह भूचंबकीय तूफान (Geomagnetic Storm) आता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

नासा ने देखी पहले सौर ज्वाला
नासा का कहना है कि सूर्य के बाएं हिस्से के सक्रिय क्षेत्र में छोटी ज्वालाओं की शृंखला देखने को मिली थी जिससे हुए उत्सर्जन से सौर पदार्थ 25-26 अक्टूबर को देखने को मिला.  एजेंसी ने अपनी सोलर डायनामिक्स ऑबजर्वेटरी के जरिए नआ वीडियो फुटेज जारी किया है जो कुछ दिनों की सक्रियता को दिखा रहा है जिसका अंत एक सौर ज्वाला के रूप में देखने को मिला.

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किस श्रेणी की ज्वाला
28 अक्टूबर को सूर्य ने एक बड़ी ज्वाला निकाली जिसका असर पृथ्वी तक 48 घंटे बाद तक पहुंचा. यह ज्वाला एक्स1 ज्वाला की श्रेणी थी, एक्स श्रेणी बहुत ही तीव्र श्रेणी की ज्वाला होती हैं. जबकि इनकी संख्या इनकी शक्ति के बारे में बताती हैं. एक्स2 एक्स 1 से दोगुनी शक्तिशाली होती हैं जबकि एक्स3 तीन गुना ज्यादा शक्तिशाली होती हैं. जबकि एक्स10 असामान्य रूप से अतिशक्तिशाली ज्वाला को दर्शाती हैं.

इंसान को नकुसान नहीं लेकिन
सौर ज्वाला से शक्तिशाली विकिरण का प्रस्फोट होता है जो अंतरिक्ष और पृथ्वी दोनों में मौजूद तकनीकी उपकरणों को खराब करने की क्षमता रखते हैं. सौर ज्वाला से आने वाले ये विकिरण पृथ्वी के वायुमंडल को भेदकर इंसानों को तो नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं, लेकिन  ये इतने तीव्र जरूर होते हैं जिससे वायुमंडल की परतों वाले जीपीएस और संचार संबंधी उपकरणों में खराबी पैदा कर सकते हैं.

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सूर्य की सतह पर हर 11 साल बादल आया बदलाव सौर चक्र (Solar Cycle) होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

हर 11 साल बाद सौरचक्र
यह एक्स श्रेणी का दूसरी सौर ज्वाला है जो 25 सौर चक्र में आई है. इस चक्र की शुरुआत दिसंबर 2019 में हुई थी. नया चक्र हर 11 साल बाद शुरू होता है. हर चक्रम में सूर्य शांत से सक्रिय और फिर तूफानी अवस्था में आकर फिर शांत हो जाता है.  इस चक्र में सूर्य की सतह की सक्रियता बढ़ रही है जिससे सौर ज्वाला पैदा हो रही हैं.

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सौर चक्र में सतह पर सक्रियता से सौर पदार्थ का प्रस्फोट होता है. इससे अति ऊर्जावान कणों का विकिरण होता है. 28 अक्टूबर को ऐसा ही विकिरण देखने को मिला जिससे प्लाज्मा कणों की सुनामी आ गई और प्लाज्मा तरंगों सूर्य के पूरे वायुमंडल में हर तरफ फैल गईं.

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