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चारधाम परियोजना में सड़क की चौड़ाई बढ़ाए जाएगी या नहीं? SC ने सुरक्षित रखा फैसला


केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से सितंबर 2020 के आदेश में संशोधन की मांग की है जिसमें चारधाम सड़कों की चौड़ाई को 5.5 मीटर तक सीमित करने का आदेश दिया था. केंद्र का कहना है कि ये  भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा की ओर जाने वाली सीमा सड़कों के लिए फीडर सड़कें हैं, उन्हें 10 मीटर तक चौड़ा करने की अनुमति दी जानी चाहिए. 

याचिकाकर्ता की ओर से कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा हिमालय के पर्यावरण की स्थिति खतरे में है. अभी तक आधी परियोजना पूरी हुई है हादसा दुनिया ने देखा है. अब आपको पूरा करना है तो जरूर करें लेकिन बर्बादी के लिए तैयार रहें. नुकसान कम करने के उपाय करने की बजाय उसे बढ़ाया जा रहा है. सड़कों को चौड़ा करने के उपाय तकनीकी और पर्यावरण उपायों के साथ होने चाहिए. डिजाइन, ढलान, हरियाली, जंगल कटान, विस्फोट से पहाड़ काटने आदि को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों की राय से करना चाहिए. 

”राष्‍ट्र की सुरक्षा को प्राथमिकता” : चारधाम प्रोजेक्‍ट के लिए सड़क की चौड़ाई बढ़ाने का मामले में सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा भविष्य के उपाय आपके पास हो तो वो बताएं. 

गोंजाल्विस ने कहा कि ऋषिकेश से माना इलाके में विकास के नाम पर जंगलों की अंधाधुंध कटाई पहाड़ों को विस्फोट से तोड़ने के कार्यों से भूस्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं. प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़ और बादल फटने की भी घटनाएं बढ़ी हैं. इस बाबत गठित उच्चाधिकार समिति यानी एचपीसी की भी रिपोर्ट्स ने कई गंभीर मुद्दों की ओर इशारा किया है. 

साथ ही उन्होंने कहा, हिमालय के उच्च इलाकों में पचास किलोमीटर के दायरे में कई हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट चल रहे हैं. चारधाम क्षेत्र में भी विकास के नाम पर अंधाधुंध निर्माण जारी है. तुरंत इन्हें रोकने की जरूरत है. रिफ्लेक्टर लगाए जाएं जिनसे पहाड़ों की छाया वाले इलाकों में भी रोशनी जाए, हरियाली बढ़े. कई दर्रो में तो जहां सूरज की रोशनी नहीं आती वहां वनस्पति भी नहीं होती, इस उपाय से हरियाली बढ़ेगी. इन उपायों का आने वाली पीढ़ियों पर असर पड़ेगा, क्योंकि पर्यावरण, गंगा यमुना जैसी नदियों के प्रवाह और संरक्षण पर असर पड़ेगा. भगवान चार धाम में नहीं बल्कि प्रकृति में है. 

केंद्र सरकार ने कोर्ट बताया कि उत्तराखंड में भूस्खलन की चपेट में आने वाले क्षेत्रों के बारे में अध्ययन चल रहा है, जहां भारत-चीन सीमा की ओर जाने वाली सड़कों का निर्माण किया जाना है.जनवरी 2021 में भारतीय भौगोलिक सर्वेक्षण, रक्षा भूवैज्ञानिक अनुसंधान संगठन और टिहरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक कॉरपोरेशन के साथ संवेदनशील स्थानों पर अध्ययन, नदियों/घाटियों में  डंपिंग को रोकने के लिए कदम और अन्य मुद्दों के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं. 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या पहाड़ी कटाव के प्रभाव को कम करने और भूस्खलन को रोकने के लिए कोई अध्ययन किया गया है. इस पर सरकार ने कहा कि स्थल का दौरा किया जा रहा है. रिपोर्ट्स का इंतजार है.



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