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बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-V (Agni-V) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया


भारत ने 27 अक्टूबर, 2021 को सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया।

मुख्य बिंदु

  • इस मिसाइल को ओडिशा तट से एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लॉन्च किया गया।
  • यह मिसाइल तीन चरणों वाले ठोस-ईंधन वाले इंजन का उपयोग करती है, जो बहुत उच्च सटीकता के साथ 5000 किमी की सीमा तक के लक्ष्यों को मार सकती है।

विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध (Credible Minimum Deterrence)

अग्नि-5 मिसाइल का सफल प्रक्षेपण भारत की “विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता” की नीति के अनुरूप है। यह नीति ‘पहले उपयोग नहीं’ (No First Use) की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

अग्नि-5 का निर्माण 

अग्नि-5 मिसाइल का निर्माण रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (DRDO) ने किया है।

पृष्ठभूमि

अग्नि-5 मिसाइल का पहला परीक्षण अप्रैल 2012 में किया गया था। अंतिम परीक्षण लगभग तीन साल पहले 2018 में किया गया था।

Agni-V

अग्नि-V एक भारतीय परमाणु सक्षम अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित किया गया है। इस मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 5000 से 8000 किमी है। यह तीन चरणों वाली, ठोस ईंधन वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे एक ट्रक द्वारा ले जाया जाता है और एक कनस्तर का उपयोग करके लॉन्च किया जाता है।

अग्नि V का महत्व

अग्नि V का उपयोग चीन के खिलाफ भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। इससे पहले, भारत में सबसे लंबी दूरी की मिसाइल अग्नि- III थी, जिसकी मारक क्षमता 3000-3500 किमी थी। यह सीमा चीन के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए पर्याप्त नहीं थी। इस प्रकार, DRDO 2007 से अग्नि-V नामक इस मिसाइल के उन्नत संस्करण पर काम कर रहा था।

Categories: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स

Tags:Agni-V , Credible Minimum Deterrence , DRDO , अग्नि-V , रक्षा अनुसंधान विकास संगठन , विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध



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