यूके में कानूनी रूप से वायु प्रदूषण के कारण विश्व की पहली मृत्यु दर्ज की गयी

ब्रिटेन ने दुनिया की ऐसी पहली मृत्यु को कानूनी रूप से प्रमाणित किया है जो वायु प्रदूषण के कारण हुई है। लंदन में एक व्यस्त सड़क के पास रहने वाली एक 9 साल की लड़की की सांस की तकलीफ के कारण मृत्यु हो गयी है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दुनिया भर में वायु प्रदूषण से प्रति वर्ष 4.2 मिलियन लोगों की मृत्यु होती है। इसके अलावा, लगभग 3.8 मिलियन मौतें घरेलू वायु प्रदूषकों के कारण होती हैं। वैश्विक जनसंख्या का 91% ऐसे वायु गुणवत्ता वाले क्षेत्रों में रहता है जो डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं है।

मुख्य बिंदु

फ़रवरी 2013 में, नौ वर्षीय एला एदो किसी-डेबराह दक्षिण पूर्व लंदन में एक व्यस्त भीड़भाड़ वाली सड़क से 30 मीटर की दूरी पर रहती थीं। 2014 में, एक जांच में पाया गया कि उनकी मृत्यु श्वसन सम्बन्धी समस्या के कारण हुई है। 2019 में, लड़की के परिवार ने जांच को फिर से खोलने के लिए उच्च न्यायालय में एक आवेदन दायर किया। दूसरी जांच हाल ही में की गयी।

वायु प्रदूषण का प्रभाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वायु प्रदूषण को ‘साइलेंट किलर’ माना जाता है। दुनिया के 90% से अधिक बच्चे हर दिन जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं।

भारत में वायु प्रदूषण

दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में से 21 भारत में हैं । भारत में 51% वायु प्रदूषण उद्योगों द्वारा, 27% वाहनों द्वारा, 17% फसल जलने और 5% आतिशबाजी के कारण होता है। भारत में कम से कम 140 मिलियन लोग ऐसी हवा में सांस लेते हैं जो WHO द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से दस गुना अधिक है।

भारत में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार द्वारा निम्नलिखित उपाय अपनाए गए हैं :

  • वायु प्रदूषण को विनियमित करने के लिए, भारत ने1981 में वायु (प्रदूषण पर रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम पारित किया था। हालांकि, अधिनियम नियमों के खराब प्रवर्तन के कारण प्रदूषण को कम करने में विफल रहा।
  • राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांकशुरू किया गया था।
  • 2019 में, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रमशुरू किया गया था।

 

 

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